Anchal Paliwal
आसमान का हृदय
“जब यह आसमान अपने हृदय में भारीपन महसूस करता होगा, तो क्या करता होगा?” आज आसमान में फिर काले बादल छाए हैं;ऐसा लग रहा है, मानो आसमान का हृदय बहुत भारी है। बादलों से कुछ हल्की-हल्की बूंदें बारिश बनकर गिरने लगी हैं। शायद वह अपने दुखों का एक छोटा-सा हिस्सा हमें सौंपना चाहता है।
वह हिमालय सी विशाल है
वह स्त्री हिमालय-सी है— अचल, विराट, प्रेम और सुंदरता की मूरत,अगम्य साहस का प्रतीक। इतिहास, भूगोल, युग, समय,सुख दुख और चारों युग—सब उसी पर टिके हैं। लकड़ियों में खाना बनाती हुई,चारा लाती हुई, बोझ और भारे उठाती हुई, घर संभालती हुई,संघर्षों से घिरी हुई, मिट्टी से चूल्हे को लीपती हुई—वह स्त्री। खुद किस मिट्टी से … Read more
तुम बताना उन्हें
तुम बताना उन्हें, उस रोशन करते दिये की कहानी। तुम बताना उन्हें, उस दिये में जल रही बाती का अस्तित्व। तुम बताना उन्हें, विज्ञान के चमकते आविष्कारों मेंरात को मिटती मधुमक्खियों का अस्तित्व। घनघोर कोहरे और बरसाती मौसम में,रात के अंधेरों में उन चमकते जुगनुओं का महत्व। तुम बताना उन्हें! तुम बताना उन्हें, ज़िंदगी … Read more
फिर लौट आया है बसंत
फिर लौट आया है बसंत,भौंरों को फूलों से मिलाने । फिर लौट आया है बसंत ,खेत में सरसों के पीले फूलों की चादर ओढाने । फिर लौट आया है बसंत,खेतों की मुंडेरों पर , लाल , पीले, नीले और ढेरों प्यारे फूल उगाने । हां !फिर लौट आया है बसंत ,घुघूती चिड़िया , फूलारी और … Read more
नन्ही गौरैया
क्या मुझे गौरैया से प्रेम है ?कई सालों से मेरी घर की छत पर, कोई गौरैया पानी पीने नहीं आई ।मैंने अपनी घर की मुंडेरों पर गौरैया को, गीत गाते हुए देख अपना सारा बचपन बिताया है। हां !गौरैया को याद करते ही,मेरे अंतरमन में उठती है एक वेदना सी ।मेरे हृदय के आलिंद निलय … Read more
कुछ तो पूर्ण हुआ
हां, तो लिखा है! किसी ने पूछा, ये जो लिखती हो भावों को अपने, या किसी किताब को पढ़ती हो? शब्दों को खुद बुनती हो, या ढूंढ लेती हो किसी शब्दसागर से? तो मैं कहूं… जब देखूं मै घनघोर निशा में, उस शशि की कौमुदी को, तो मेरे हृदय में, मेघ बन भाव उमड़ आते … Read more