अस्तित्व

पेड़ से गिरते पत्ते कभी शोर नहीं करते।
सूखे पत्ते शोर करते हैं,
जब वे हमारे पैरों तले आते हैं।


लेकिन पेड़ पर रहते हुए तो उन्होंने कभी शोर नहीं किया।


हाँ, शायद इसलिए कि पेड़ से जुड़े रहते हुए हमने उनके अस्तित्व को अनदेखा किया है।
फिर, पेड़ से बिछड़ जाने के बाद वे हमें अपने अस्तित्व और पीड़ा का भान कराते हैं।


समाज में ये पत्ते अक्सर वही व्यक्ति होते हैं,
जिनके हिस्से सबसे अधिक शिकायतें और जिम्मेदारियाँ आती हैं,
जिनके प्रयासों को कभी महत्व नहीं मिल पाता।


फिर एक दिन,
उनका मौन इन्हीं सूखे, चरमराते पत्तों की तरह
हमें उनके अस्तित्व का स्मरण कराने लगता है।
तब समझ आता है कि शोर हमेशा आवाज़ से नहीं होता,


कभी-कभी उपेक्षा की पीड़ा भी बहुत दूर तक सुनाई देती है।

2 thoughts on “अस्तित्व”

Leave a Comment